लखनऊ: प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर में रविवार को सांप्रदायिक सौहार्द्र और हिंदू-मुस्लिम एकता की नई मिसाल देखने को मिली. यूं तो इस मंदिर में हर शाम को आरती होती है, लेकिन रविवार की शाम को आरती के साथ यहां रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया. यह आयोजन सामाजिक भाई-चारा स्थापित करने के लिए किया गया था. मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी ने राजधानी में पहली बार रोजा इफ्तार का एहतिमाम किया.
जहां मुल्क में एक तरफ फ़िरक़ा परस्त ताकते लोगों को बांटने की नाकाम कोशिशे जाऱी किये हैं तो दूसरी तरफ लखनऊ में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी ने राजधानी में पहली बार रोजा इफ्तार का एहतिमाम किया. इसमें बड़ी तादाद में सभी मज़हबों के लोगों ने शिरकत की. यही नहीं मनकामेश्वर मठ के आरती की जगहा रोज़ा इफ्तार के बाद मुसलमानों ने नमाज़ अदा कर मुल्क में अमनो चैन की दुआ मांगी.
लखनऊ में पहली बार ऐसा हुआ जब एक महंत ने रोज़ा अफ्तार का एहतिमाम किया रोज़ा इफ्तार का एहतिमाम करने वाली महंत दिव्य गिरी ने कहा कि जिस तरह से दिखाया जाता है समाज में, लेकिन मन में कोई भेदभाव हम लोगों में नहीं है. रोजा इफ्तार सब लोगों को करना चाहिए. जब वह लोग बड़े मंगल पर प्रसाद तक़सीम कर सकते हैं तो हम लोग रोजा इफतार क्यों नहीं कर सकते.
नवाब मीर जाफर अब्दुल्लाह ने कहा कि मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्यागिरी ने इस अफ्तार से गंगा जमुनी तहजीब का प्रैक्टिकल नमूना पेश किया गया है. गोमती किनारे इस तरह के प्रोग्राम का किया जाना बेहतरीन क़दम है. लोग बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन अमल बहुत कम लोग करते हैं, यह दुनिया के लिए एक मिसाल होगी, जो समाज को बांटने और इंसानियत को बांटने की बात करते हैं. उनके लिए बहुत बड़ा तमाचा है.
Source:-ZEENEWS
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जहां मुल्क में एक तरफ फ़िरक़ा परस्त ताकते लोगों को बांटने की नाकाम कोशिशे जाऱी किये हैं तो दूसरी तरफ लखनऊ में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी ने राजधानी में पहली बार रोजा इफ्तार का एहतिमाम किया. इसमें बड़ी तादाद में सभी मज़हबों के लोगों ने शिरकत की. यही नहीं मनकामेश्वर मठ के आरती की जगहा रोज़ा इफ्तार के बाद मुसलमानों ने नमाज़ अदा कर मुल्क में अमनो चैन की दुआ मांगी.
लखनऊ में पहली बार ऐसा हुआ जब एक महंत ने रोज़ा अफ्तार का एहतिमाम किया रोज़ा इफ्तार का एहतिमाम करने वाली महंत दिव्य गिरी ने कहा कि जिस तरह से दिखाया जाता है समाज में, लेकिन मन में कोई भेदभाव हम लोगों में नहीं है. रोजा इफ्तार सब लोगों को करना चाहिए. जब वह लोग बड़े मंगल पर प्रसाद तक़सीम कर सकते हैं तो हम लोग रोजा इफतार क्यों नहीं कर सकते.
नवाब मीर जाफर अब्दुल्लाह ने कहा कि मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्यागिरी ने इस अफ्तार से गंगा जमुनी तहजीब का प्रैक्टिकल नमूना पेश किया गया है. गोमती किनारे इस तरह के प्रोग्राम का किया जाना बेहतरीन क़दम है. लोग बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन अमल बहुत कम लोग करते हैं, यह दुनिया के लिए एक मिसाल होगी, जो समाज को बांटने और इंसानियत को बांटने की बात करते हैं. उनके लिए बहुत बड़ा तमाचा है.
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