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Tuesday, 31 July 2018
Friday, 29 June 2018
आजम खान का तोगड़िया पर तंज, 'ताजमहल तोड़कर शिव मंदिर बना, तो मैं भी मदद करूंगा'
नई दिल्ली/रामपुर : अयोध्या में राममंदिर नहीं बनने से प्रवीण तोगड़िया की नाराजगी और नया संगठन बनाने पर समाजवादी नेता आजम खान ने तीखी टिप्पणी की है. आजम खान ने कहा जो लोग आज कानून की बात कर रहे हैं, वो ये बताएं कि क्या उस वक्त जब बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था. तब कानून माना गया था और जब उस वक्त नहीं माना गया, तो अब कानून की बात क्यों? आजम खान ने कहा कि अगर ताजमहल को तोड़कर विवादित स्थल पर सीएम योगी भगवान शिव का भी मंदिर बनाएंगे. तो, दूसरा फावड़ा मैं मारूंगा. केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इन 4 सालों में जितनी अमानवीय घटना हुई है, उसने पूरी दुनिया की मानवता शर्मसार हुई है.
ताजमहल तोड़ने में मैं मदद कंरूगा: आजम खान
आजम खान ने कहा है कि वो गुलामी की निशानी 'ताजमहल' को तोड़ने में सीएम योगी की मदद करेंगे. आजम ने कहा, 'ताजमहल को तोड़ने के लिए पहला हथौड़ा योगी को मारना होगा. मैं अपने 10-20 हजार मुस्लिम समर्थकों को लेकर उनका साथ दूंगा.' आजम का कहना है कि उन्हें योगी ने बताया है कि ताजमहल भगवान शिव का मंदिर है. आपको बता दे कि इससे पहले भी आजम खान ताजमहल को तोड़ने की बात कर चुके हैं.
हर मुल्क में होता है सर्जिकल स्ट्राइक
सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सामने आने पर आजम खान ने कहा चुनाव करीब आ गया है. इसलिए सरकार ने वीडियो सबके सामने रख दिया गया है. उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक हमेशा हर मुल्क की सरहदों पर होती है. हम कोई निराले नहीं है. ये सीक्रेट एक्शन होता है. सर्जिकल स्ट्राइक कितनी पब्लिसिटी करनी चाहिए. ये पीएम मोदी से बेहतर और कौन जानता हैं.
4 साल के हिसाब में सामने आया वीडियो
आजम खान ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ठीक चुनाव से पहले सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सब के सामने लाना सरकार की रणनीति थी. उन्होंने कहा कि चुनाव आने वाले है और जनता मोदी सरकार से उनके काम के हिसाब मांगेगी. इसलिए ये वीडियो उन्होंने जारी किया.
Source:-ZEENEWS
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ताजमहल तोड़ने में मैं मदद कंरूगा: आजम खान
आजम खान ने कहा है कि वो गुलामी की निशानी 'ताजमहल' को तोड़ने में सीएम योगी की मदद करेंगे. आजम ने कहा, 'ताजमहल को तोड़ने के लिए पहला हथौड़ा योगी को मारना होगा. मैं अपने 10-20 हजार मुस्लिम समर्थकों को लेकर उनका साथ दूंगा.' आजम का कहना है कि उन्हें योगी ने बताया है कि ताजमहल भगवान शिव का मंदिर है. आपको बता दे कि इससे पहले भी आजम खान ताजमहल को तोड़ने की बात कर चुके हैं.
हर मुल्क में होता है सर्जिकल स्ट्राइक
सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सामने आने पर आजम खान ने कहा चुनाव करीब आ गया है. इसलिए सरकार ने वीडियो सबके सामने रख दिया गया है. उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक हमेशा हर मुल्क की सरहदों पर होती है. हम कोई निराले नहीं है. ये सीक्रेट एक्शन होता है. सर्जिकल स्ट्राइक कितनी पब्लिसिटी करनी चाहिए. ये पीएम मोदी से बेहतर और कौन जानता हैं.
4 साल के हिसाब में सामने आया वीडियो
आजम खान ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ठीक चुनाव से पहले सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सब के सामने लाना सरकार की रणनीति थी. उन्होंने कहा कि चुनाव आने वाले है और जनता मोदी सरकार से उनके काम के हिसाब मांगेगी. इसलिए ये वीडियो उन्होंने जारी किया.
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Friday, 22 June 2018
छत्तीसगढ़: मिड डे मील में बच्चों को परोसी जा रही है घुन लगी दाल और सड़ी सब्जियां
रायपुर: नया शिक्षण सत्र प्रारंभ हुए दस दिन से अधिक हो गए हैं, बावजूद स्कूलों की व्यवस्था अभी भी काफी लचर बनी हुई है. ना तो स्कूल में शिक्षक आ रहे हैं और ना ही बच्चों को मेन्यू के अनुसार मिड डे मील मिल पा रहा है. कुछ स्कूलों में जहां भोजन दिया भी जा रहा है तो वहां बच्चों को सड़ी हुई घुन लगी दाल वो भी बिना सब्जी के परोसी जा रही है. वहीं कहीं हफ्तों से सिर्फ आलू की सब्जी ही खिलाई जा रही है.
मेन्यू चार्ट के मिड डे मील में मिलावट
सरकार ने सभी स्कूलों में मेन्यू चार्ट लगवा रखा है लेकिन इस मेनू चार्ट के अनुसार बच्चों को खाना परोसा जा रहा है या नहीं इसकी खबर लेने वाला कोई नहीं है. सरकार ने हर दिन के अनुसार अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक भोजन स्कूल में ही बनाकर खिलाने की व्यवस्था कर रखी है. छत्तीसगढ़ के पेंड्रा के सरकारी स्कूलों में शुक्रवार की थाली के अनुसार बच्चों को चावल, मिक्स दाल, पापड़, टमाटर की चटनी, पत्ता गोभी की सब्जी मिलनी चाहिए थी लेकिन जब इन स्कूलों में मीडिया की टीम पहुंची तो जो दाल बच्चों को खिलाने के लिए परोसी गई थी वह पूरी तरह घुन लगी हुई थी. रसोइया खुद ही इसे खाने योग्य नहीं होने की बात कह रहा था.
कान बंद करके बैठे हैं अधिकारी
वैसे तो व्यवस्था संचालन के लिए और उस पर नजर बनाए रखने के लिए विकासखंड कार्यालय में बीइओ, ABEO और मध्यान्ह भोजन प्रभारी नियुक्त हैं जिनकी जिम्मेदारी प्रतिदिन व्यवस्था देखने की है. खबर मिलने के बाद संबंधित शिक्षकों और समूहों को नोटिस जारी कर कार्रवाई और शीघ्र ही व्यवस्था बनाने की बात सामने आई है. छात्रों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की मंशा से सरकार ने मध्यान्ह भोजन योजना शुरू की है. इसके संचालन की जिम्मेदारी गांव के स्व सहायता समूहों को दी गई है लेकिन संचालनकर्ता समूह भी अब बच्चों की थाली से निवाला छीनने में लग गए हैं. जिम्मेदार अधिकारी मीडिया से खबर मिलने के इंतजार में बैठे है.
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Wednesday, 20 June 2018
JNU ने ‘इस्लामी आतंकवाद’ पर कोर्स से किया इनकार
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) प्रशासन ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग को भेजे अपने जवाब में कहा है कि विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ पर किसी पाठ्यक्रम का प्रस्ताव नहीं किया गया है. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफर - उल - इस्लाम खान ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि जेएनयू के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रमोद कुमार ने कहा कि अकादमिक परिषद की बैठक में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ पर कोई पाठ्यक्रम प्रस्तावित नहीं किया गया. मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने पिछले महीने नोटिस जारी करके विश्वविद्यालय में प्रस्तावित पाठ्यक्रम को शुरू करने का कारण पूछा था.
खान ने बताया कि कुलसचिव ने आयोग को प्रस्तावित ‘ सेंटर फॉर नेशनल सिक्यूरिटी स्टडिज ’ के अवधारणा पत्र की एक प्रति भेजी है और कहा है कि जेएनयू को इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ पर कोई पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है या नहीं. कुमार ने 18 मई को हुई 145 वीं अकादमिक परिषद की बैठक में हुई चर्चा के विवरण की एक प्रति भी आयोग को दी है जहां इसे चर्चा के लिए रखा गया था.
आयोग के अध्यक्ष ने कहा ‘जेएनयू के कुलसचिव के आश्वासन के विपरीत , अवधारणा पत्र में प्रस्तावित केंद्र के ‘ मुख्य क्षेत्रों के हिस्से के रूप में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ शामिल है. इन क्षेत्रों में पढ़ाने से पहले उनमें शोध करना होगा.’
उन्होंने कहा कि आयोग ने जेएनयू को फिर से पत्र लिखा है और कहा है कि प्रस्तावित केंद्र अच्छी पहल है और देश को इसकी जरूरत है लेकिन केंद्र में शोध और शिक्षण के विषय के तौर पर ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ का विषय लाना ‘ दोषपूर्ण ’ है और यह परिसर में सांप्रदायिक सौहार्द को ‘ खराब ’ करेगा और मुसलमानों को लेकर एक गलत विचार पैदा करेगा.
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उन्होंने बताया कि जेएनयू के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रमोद कुमार ने कहा कि अकादमिक परिषद की बैठक में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ पर कोई पाठ्यक्रम प्रस्तावित नहीं किया गया. मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने पिछले महीने नोटिस जारी करके विश्वविद्यालय में प्रस्तावित पाठ्यक्रम को शुरू करने का कारण पूछा था.
खान ने बताया कि कुलसचिव ने आयोग को प्रस्तावित ‘ सेंटर फॉर नेशनल सिक्यूरिटी स्टडिज ’ के अवधारणा पत्र की एक प्रति भेजी है और कहा है कि जेएनयू को इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ पर कोई पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है या नहीं. कुमार ने 18 मई को हुई 145 वीं अकादमिक परिषद की बैठक में हुई चर्चा के विवरण की एक प्रति भी आयोग को दी है जहां इसे चर्चा के लिए रखा गया था.
आयोग के अध्यक्ष ने कहा ‘जेएनयू के कुलसचिव के आश्वासन के विपरीत , अवधारणा पत्र में प्रस्तावित केंद्र के ‘ मुख्य क्षेत्रों के हिस्से के रूप में ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ शामिल है. इन क्षेत्रों में पढ़ाने से पहले उनमें शोध करना होगा.’
उन्होंने कहा कि आयोग ने जेएनयू को फिर से पत्र लिखा है और कहा है कि प्रस्तावित केंद्र अच्छी पहल है और देश को इसकी जरूरत है लेकिन केंद्र में शोध और शिक्षण के विषय के तौर पर ‘ इस्लामी आतंकवाद ’ का विषय लाना ‘ दोषपूर्ण ’ है और यह परिसर में सांप्रदायिक सौहार्द को ‘ खराब ’ करेगा और मुसलमानों को लेकर एक गलत विचार पैदा करेगा.
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Monday, 18 June 2018
पेट्रोल सस्ता होने का इंतजार कर रहे लोगों को झटका, जेटली ने कहा ये
नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावना को सोमवार को एक तरह से खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का कोई भी कदम नुकसानदायक हो सकता है. साथ ही उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे अपने हिस्से के करों का 'ईमानदारी' से भुगतान करें, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों पर राजस्व के स्रोत के रूप में निर्भरता कम हो सके. फेसबुक पोस्ट में जेटली ने लिखा, 'सिर्फ वेतनभोगी वर्ग ही अपने हिस्से का कर अदा करता है. जबकि ज्यादातर अन्य लोगों को अपने कर भुगतान के रिकॉर्ड को सुधारने की जरूरत है. यही वजह है कि भारत अभी तक एक कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है.'
जीडीपी अनुपात सुधरकर 11.5 प्रतिशत हुआ
जेटली ने कहा, 'मेरी राजनीतिज्ञों और टिप्पणीकारों से अपील है कि गैर - तेल कर श्रेणी में अपवंचना रुकना चाहिए. अगर लोग ईमानदारी से कर अदा करेंगे तो कराधान के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा. बहरहाल, मध्य से दीर्घावधि में राजकोषीय गणित में कोई भी बदलाव प्रतिकूल साबित हो सकता है.' उन्होंने कहा कि पिछले चार साल के दौरान केंद्र सरकार का कर - जीडीपी अनुपात 10 प्रतिशत से सुधरकर 11.5 प्रतिशत हो गया है. इसमें से करीब आधी (जीडीपी का 0.72 प्रतिशत) वृद्धि गैर- तेल कर जीडीपी अनुपात से हुई है.
जेटली ने कहा, 'उपभोक्ताओं को राहत सिर्फ राजकोषीय रूप से जिम्मेदार और वित्तीय दृष्टि से मजबूत केंद्र सरकार और वे राज्य दे सकते हैं जिनको तेल कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी की वजह से अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है. उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में अनुपालन के ऊंचे स्तर के बावजूद गैर - तेल कर के मामले में भारत अभी भी कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है.
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जीडीपी अनुपात सुधरकर 11.5 प्रतिशत हुआ
जेटली ने कहा, 'मेरी राजनीतिज्ञों और टिप्पणीकारों से अपील है कि गैर - तेल कर श्रेणी में अपवंचना रुकना चाहिए. अगर लोग ईमानदारी से कर अदा करेंगे तो कराधान के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा. बहरहाल, मध्य से दीर्घावधि में राजकोषीय गणित में कोई भी बदलाव प्रतिकूल साबित हो सकता है.' उन्होंने कहा कि पिछले चार साल के दौरान केंद्र सरकार का कर - जीडीपी अनुपात 10 प्रतिशत से सुधरकर 11.5 प्रतिशत हो गया है. इसमें से करीब आधी (जीडीपी का 0.72 प्रतिशत) वृद्धि गैर- तेल कर जीडीपी अनुपात से हुई है.
जेटली ने कहा, 'उपभोक्ताओं को राहत सिर्फ राजकोषीय रूप से जिम्मेदार और वित्तीय दृष्टि से मजबूत केंद्र सरकार और वे राज्य दे सकते हैं जिनको तेल कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी की वजह से अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है. उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में अनुपालन के ऊंचे स्तर के बावजूद गैर - तेल कर के मामले में भारत अभी भी कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है.
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Sunday, 17 June 2018
इन देशों में गधों की हो रही चोरी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
नैरोबी: चीन में जिलेटिन की मांग की वजह से अफ्रीकी देशों से काला बाजारी के जरिए गधों की खाल को चीन भेजा जा रहा है. इस वजह से अफ्रीका के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां काफी संख्या में लोग कृषि कार्यों और भारी सामानों की ढुलाई के लिए गधों पर निर्भर होते हैं. हाल ही में यहां जोसेफ कामोनजो कारियूकी के तीन गधे लापता हो गए थे और बाद में इन सब के अवशेष बरामद हुए. केन्या से लेकर बुरकिनी फासो , मिस्र से लेकर नाइजीरिया तक के पशु अधिकार समूहों का कहना है कि गधे के खाल की कालाबाजारी करने वाले चीन में जेलिटिन की मांग को पूरा करने के लिए गधों को मारकर उनकी खाल को निकालते हैं.
जिलेटिन गधे की खाल से बनता है और इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य क्षेत्र में होता है. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन में गधों की संख्या में कमी आने से अब इसकी आपूर्ति अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका से हो रही है.
बेजुबान जानवरों के खिलाफ बेरहमी करने वालों पर रहमदिल कानून
आपको बता दें कि जानवरों को चोट पहुंचाना Prevention of Cruelty to Animals Act 1960 यानी PCA Act की धारा 11 के तहत एक अपराध माना गया है.
- इसी तरह IPC की धारा 428 और 429 के तहत भी जानवरों के खिलाफ हिंसा अपराध की श्रेणी में आती है.
- आपको जानकर हैरानी होगी कि जानवरों के खिलाफ हिंसा करने वाले व्यक्ति पर अभी सिर्फ 10 रुपये लेकर 100 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- PCA Act के मुताबिक जानवरों को चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति को पहली बार ऐसा करने पर 50 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ता है. जबकि दूसरी बार ऐसा करने पर 100 रुपये का जुर्माना और 3 महीनें तक की कैद हो सकती है।
- आपको ये भी बता दें कि जानवरों के खिलाफ किस तरह की हिंसा को भारत का कानून अपराध मानता है. किसी भी जानवर को पीटना... उसे लात मारना...और जरूरत से ज्यादा वज़न ढोने पर मजूबर करने जैसी हरकतें PCA Act 1960 के मुताबिक कानूनन अपराध हैं।
- भारत का कानून बूढ़े और बीमार जानवर से काम लेने की इजाजत भी नहीं देता है. किसी जानवर को तकलीफ पहुंचाकर एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाना भी अपराध है।
- किसी जानवर को जरूरत से ज्यादा छोटे पिंजरे में रखना और उसे छोटी ज़ंजीर से बांधना भी भारतीय कानून के तहत एक अपराध है.
- अगर आपके पास भी कोई पालतू जानवर है और आप उसे पर्याप्त भोजन..रहने की जगह और पीने के लिए पानी नहीं देते हैं तो भी कानून की नज़र में आप अपराधी हैं.
Source:-ZEENEWS
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जिलेटिन गधे की खाल से बनता है और इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य क्षेत्र में होता है. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन में गधों की संख्या में कमी आने से अब इसकी आपूर्ति अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका से हो रही है.
बेजुबान जानवरों के खिलाफ बेरहमी करने वालों पर रहमदिल कानून
आपको बता दें कि जानवरों को चोट पहुंचाना Prevention of Cruelty to Animals Act 1960 यानी PCA Act की धारा 11 के तहत एक अपराध माना गया है.
- इसी तरह IPC की धारा 428 और 429 के तहत भी जानवरों के खिलाफ हिंसा अपराध की श्रेणी में आती है.
- आपको जानकर हैरानी होगी कि जानवरों के खिलाफ हिंसा करने वाले व्यक्ति पर अभी सिर्फ 10 रुपये लेकर 100 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- PCA Act के मुताबिक जानवरों को चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति को पहली बार ऐसा करने पर 50 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ता है. जबकि दूसरी बार ऐसा करने पर 100 रुपये का जुर्माना और 3 महीनें तक की कैद हो सकती है।
- आपको ये भी बता दें कि जानवरों के खिलाफ किस तरह की हिंसा को भारत का कानून अपराध मानता है. किसी भी जानवर को पीटना... उसे लात मारना...और जरूरत से ज्यादा वज़न ढोने पर मजूबर करने जैसी हरकतें PCA Act 1960 के मुताबिक कानूनन अपराध हैं।
- भारत का कानून बूढ़े और बीमार जानवर से काम लेने की इजाजत भी नहीं देता है. किसी जानवर को तकलीफ पहुंचाकर एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाना भी अपराध है।
- किसी जानवर को जरूरत से ज्यादा छोटे पिंजरे में रखना और उसे छोटी ज़ंजीर से बांधना भी भारतीय कानून के तहत एक अपराध है.
- अगर आपके पास भी कोई पालतू जानवर है और आप उसे पर्याप्त भोजन..रहने की जगह और पीने के लिए पानी नहीं देते हैं तो भी कानून की नज़र में आप अपराधी हैं.
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Saturday, 16 June 2018
वाराणसी: डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद चली गई मरीजों की आंखों की रोशनी
नई दिल्ली/वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के मारवाड़ी अस्पताल में डॉक्टर्स की लापरवाही की वजह से कई मरीजों के आंखों की रोशनी खत्म होने की कगार पर है. जानकारी के मुताबिक, गत मंगलवार (12 जून) को 6 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था. डॉक्टर्स ने ऑपरेशन के 24 घंटे बाद आंखों की रोशनी लौटने की बात कही थी. लेकिन, चार दिन बाद भी इनकी आंखों में रोशनी नहीं लौटी. मामला उजागर होने के बाद मरीजों के परिवारवालों ने हंगामा किया.
ऑपरेशन के 72 घंटे बाद भी जब मरीजों को कुछ भी दिखाई नहीं पड़ा तो उनके परिवारजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद चिकित्सक के कहने पर एक निजी अस्पताल में मरीजों की जांच कराई गई. डॉक्टर सनी गुप्ता मरीजों को लेकर पहाड़िया स्थित डॉक्टर नीरज पांडेय रेटिना फाउंडेशन के यहां पहुंचे. सीटी स्कैन करने के बाद यह पता चला कि इंफेक्शन के कारण किसी की भी रोशनी नहीं आई. उन्होंने इसके लिए एक और ऑपरेशन बताया, जिसके लिए करीब 50 हजार रुपये का खर्चा भी बताया. ये जानकारी मिलने के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और दोबारा रुपये न देने की बात कहकर हंगामा करने लगे.
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ऑपरेशन के 72 घंटे बाद भी जब मरीजों को कुछ भी दिखाई नहीं पड़ा तो उनके परिवारजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद चिकित्सक के कहने पर एक निजी अस्पताल में मरीजों की जांच कराई गई. डॉक्टर सनी गुप्ता मरीजों को लेकर पहाड़िया स्थित डॉक्टर नीरज पांडेय रेटिना फाउंडेशन के यहां पहुंचे. सीटी स्कैन करने के बाद यह पता चला कि इंफेक्शन के कारण किसी की भी रोशनी नहीं आई. उन्होंने इसके लिए एक और ऑपरेशन बताया, जिसके लिए करीब 50 हजार रुपये का खर्चा भी बताया. ये जानकारी मिलने के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और दोबारा रुपये न देने की बात कहकर हंगामा करने लगे.
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