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Thursday, 19 April 2018

आपकी सैलरी पर नहीं पड़ेगी GST की मार, सरकार ने कहा- ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं

पिछले साल जीएसटी लागू होने के बाद लगातार इसमें कई बदलाव किए जा रहे हैं. पिछले दिनों सैलरी में मिलने वाले रिइंबर्शमेंट पर भी जीएसटी लगाने की खबरें आ रही थीं. हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि वह ऐसा कुछ नहीं करने जा रही है. इस संबंध में वह किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है.

दरअसल पिछले दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि देशभर की कंपनियां अपने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही हैं. क्योंकि अब कर्मचारी की सैलरी का ब्रेकअप कंपनियों पर भारी पड़ेगा. बताया जा रहा था कि हाउस रेंट, मोबाइल और टेलीफोन बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल, ट्रांस्पोर्टेशन जैसे सैलरी का ब्रेकअप जीएसटी के दायरे में आ सकता है.

बता दें कि एएआर ने एक खास मामले में फैसला दिया था कि कंपनियों द्वारा कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारी की सैलरी से कटौती जीएसटी के दायरे में होगी. इस फैसले के बाद जानकारों का मानना था कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की दी जा रही कई सुविधाएं जिसके ऐवज में सैलरी में कटौती की जाती है, को जीएसटी के दायरे में कर दिया जाएगा.

फिलहाल कंपनियां कर्मचारी को कॉस्ट टू कंपनी के आधार पर सैलरी पैकेज तैयार करती हैं और कई सेवाओं के ऐवज में कटौती को सैलरी का हिस्सा बनाकर दिया जाता है. लेकिन यदि इसे जीएसटी के दायरे में लिया जाता, तो कंपनियां किसी कर्मचारी की कॉस्ट टू कंपनी को ही आधार रखते हुए उसके ब्रेकअप में बदलाव करती, जिससे कंपनी की टैक्स देनदारी पर कोई प्रभाव न पड़े.


Source:-Aajtak

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Wednesday, 11 April 2018

किस काम की तकनीक? जकरबर्ग बोले- लीक का पता अखबार पढ़कर चला

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग आज दूसरे दिन अमेरिकी कांग्रेस के सामने हाजिर हुए हैं. यहां फिर उनसे तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि जकरबर्ग कैंब्रिज एनालिटिका डेटा लीक के मामले पर सवालों से घिरे हैं. इस दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि कभी-कभी फेसबुक से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में जानकारियां उन्हें प्रेस से मिलती हैं.

दरअसल सवाल जवाब के दूसरे दिन की कड़ी में जब अमेरिकी सांसदों ने सवाल किया- फेसबुक के पास एडवांस्ड डेटा प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी है. इसके बावजूद क्या आपको ऐसे स्कैंडल्स के बारे में प्रेस से पता चलता है? एलेग्जेंडर कोगन ने आपके यूजर डेटा को एक एजेंसी को बेच देता है, तब भी आपको भनक नहीं लगती? हम आपके वादों पर भरोसा क्यों करें जब आप लगातार ऐसा कर रहे हैं?

गौरतलब है कि, 2015 में कोगन ने डेटा अपने ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा किया था और ये जानकारियां कोगन ने कैम्ब्रिज एनालिटिका को दे दी थी. लेकिन फेसबुक ने दिसंबर 2015 में गार्डियन की रिपोर्ट सामने आने के बाद उस पर कार्रवाई शुरू किया था.

इसके अलावा भी जकरबर्ग जब पूछा गया कि क्या फेसबुक के पास ऐसी तकनीक है जिससे वो पता लगा सकते हैं कि कोई बाहरी ताकत इलेक्शन को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. जवाब में जकरबर्ग ने कहा कि, 2016 चुनाव के बाद से कंपनी इस पर लगातार काम कर रही है, ताकि आने वाले समय में ऐसा न हो और रूस जैसी कोई बाहरी ताकत चुनाव को प्रभावित ना कर सके.

Source:-Aajtak

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Monday, 9 April 2018

PNB के पूर्व अधिकारी गोकुलनाथ ने ED से कहा- नीरव और मेहुल कर रहे थे ब्लैकमेल

पीएनबी महाघोटाले के मामले में गिरफ्तार बैंक के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने ED के सामने यह कबूल किया है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी उन्हें साल 2010 से ही ब्लैकमेल कर रहे थे. ईडी सूत्रों ने आजतक को यह जानकारी दी है.

ईडी सूत्रों के अनुसार, गोकुलनाथ शेट्टी ने यह बताया है कि पीएनबी का जीएम राजेश जिंदल पूरे घोटाले का सूत्रधार था. उसने आरोप लगाया है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने 2010 से 2017 के बीच उसे ब्लैकमेल किया. शेट्टी ने अपने बयान में यह स्वीकार किया है कि साल 2010 के बाद नीरव-मेहुल की कंपनियों को 13,700 करोड़ रुपये के सभी LoU उसने ही जारी किए थे.

पीएनबी के जीएम पर मढ़ी घोटाले की जिम्मेदारी

शेट्टी ने दावा किया कि उसे इससे कोई फायदा नहीं मिला है. उसने आरोप लगाया कि पीएनबी हेड ऑफिस के जीएम राजेश जिंदल ने ही उसे सबसे पहले बिना किसी प्रतिभूति और जमानत के नीरव मोदी को एलओयू जारी करने का निर्देश दिया. शेट्टी ने ईडी के सामने यह स्वीकार किया कि राजेश जिंदल के ही निर्देश पर साल 2010 में उसने नीरव मोदी को पहला एलओयू जारी किया.

क्या है पीएनबी महाघोटाला

पंजाब नेशनल बैंक में फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिये नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के घोटाला करने की बात सामने आई थी. PNB में 11,360 करोड़ रुपये के घपले में नीरव मोदी की कंपनियों और बैंक की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस शाखा के कुछ अन्य खातों की संलिप्तता उजागर होने के बाद बड़े स्तर कार्रवाई शुरू की गई.

Source:-Aajtak

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Sunday, 8 April 2018

किम-ट्रंप मीटिंग से पहले US-नॉर्थ कोरिया कर रहे सीक्रेट बातचीत

अमेरिका और नॉर्थ कोरिया सीक्रेट तरीके से सीधी बातचीत कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नॉर्थ कोरिया तानाशाह किम जोंग उन की होने वाली मुलाकात की तैयारियों को लेकर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला...

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अधिकारियों ने ये जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है. सीआईए डायरेक्टर माइक पोम्पीओ भी मीटिंग की तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं.

बताया जाता है कि दोनों देशों के अधिकारी किसी तीसरे देश में मिले हैं ताकि ट्रंप और किम की मुलाकात की जगह तय की जा सके. हालांकि, नॉर्थ कोरिया ने खुलकर इस बात का ऐलान नहीं किया है कि उन्होंने ट्रंप को मिलने के लिए इन्विटेशन दिया है, लेकिन इसको लेकर तैयारियां की जा रही हैं.

आपको बता दें कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन भी मिलने वाले हैं. इनकी 27 अप्रैल को मुलाकात होगी. लंबे वक्त तक चले तनाव के बाद दोनों देशों के प्रमुख मिलने पर सहमत हुए हैं.

किम जोंग-उन और मून जे-इन की मुलाकात के लिए जो जगह चुनी गई है उसका नाम है पनमुनजोम. इससे पहले उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विंटर ओलंपिक गेम्स 2018 को लेकर भी दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल की पनमुनजोम में ही बातचीत हुई थी.

Source:-Aajtak

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Saturday, 7 April 2018

ट्रेनी के रूप में ज्वाइन किया बैंक, फिर बनीं पावरफुल महिला

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को लोन देने के मामले से बैंक की सीईओ चंदा कोचर विवादों में आ गई हैं. आरोप ये है कि बैंक ने 2012 में वीडियोकॉन समूह को 3,250 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. इस कर्ज के बाद वीडियोकॉन के चेयरमैन वेनूगोपाल धूत ने 64 करोड़ रुपये का निवेश चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी नू पॉवर रिन्यूएबल में किया था. इस मामले की जांच हो रही है. लेकिन इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि चंदा कोचर कौन हैं? और कैसे बैंक में शीर्ष मुकाम पर पहुंचीं? आज से 34 साल पहले उन्होंने ICICI में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया था. आगे पढ़िए, चंदा कोचर का आगे का सफर...

कोचर ने 1984 में आईसीआईसीआई में मैनेजमेंट ट्रेनी के पद पर ज्वाइन किया था. आईसीआईसीआई ने जब 1993 में कॉमर्शियल बैंकिंग में एन्ट्री का फैसला किया तो उन्हें आईसीआईसीआई बैंक के कोर टीम में रखा गया.

बैंक के रिटेल बिजनेस को सेटअप करने में कोचर का काफी अहम योगदान रहा. कॉमर्शियल बैंकिंग शुरू करने के आठ साल बाद 2001 में उन्हें रिटेल बिजनेस का हेड बनाया गया और उन्होंने एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में काम शुरू किया. फिर अप्रैल 2006 में उन्हें डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया.

कोचर को 1 मई 2009 से आईसीआईसीआई बैंक का सीईओ बनाया गया. चंदा कोचर को भारत में रिटेल बैंकिंग को दिशा देने के लिए खास तौर से जाना जाता है.

फॉर्च्यून मैगजीन की ओर से जारी दुनिया की सबसे पावरफुल मैगजीन की लिस्ट में कोचर को कई बार जगह दी गई थी. फोर्ब्स की 'दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाएं' की लिस्ट में भी कोचर का नाम कई बार शामिल किया गया था.

Source:-Aajtak

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Thursday, 5 April 2018

38वें स्थापना दिवस बीजेपी करेगी 'शक्ति प्रदर्शन', 2019 अभियान की होगी शुरुआत

मुंबई: बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपने अभियान की शुरुआत शुक्रवार को पार्टी के 38वें स्थापना दिवस पर अपनी ताकत की झलक दिखाकर करेगी. पार्टी के एक शीर्ष पदाधिकारी ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी. इस मौके पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय नौवहन मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य बीजेपी इकाई के अध्यक्ष रावसाहेब दानवे पाटील और अन्य शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे, जो पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

दानवे पाटील ने कहा, "इस विशाल सम्मेलन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु के तीन लाख से ज्यादा कार्यकर्ता, जिसमें बूथ स्तर से लेकर संसद सदस्य, शामिल होंगे." उनसे यह पूछने पर कि क्या यह सम्मेलन अगले लोकसभा चुनाव के लिए अभियान की शुरुआत का सूचक है? उन्होंने कहा, "हां, आप ऐसा कह सकते हैं."

बीकेसी मैदान में तीन विशाल मंच, सम्मेलन के लिए सात शामियाने और रात में कार्यकर्ताओं के रुकने के लिए दो अन्य शामियानों की विस्तृत व्यवस्था की गई है. इसी तरह के समान जश्न की तैयारी भारत के अलग-अलग राज्यों और सभी जिलों में की गई है.

महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटें हैं. दानवे ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को ट्रेनों, बसों और जीप से मुंबई लाने की व्यवस्था की गई है. वर्ष 1980 के सम्मेलन का जिक्र करते हुए दानवे ने कहा कि इसमें अटल बिहारी वाजपेयी को अगला प्रधानमंत्री बनाने का आह्वान किया गया था और इसे सच होने में कुछ वर्ष लगे.

Source:-Zee News

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Wednesday, 4 April 2018

यूपी में अब मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे स्‍कूल, योगी सरकार ने इस प्रस्‍ताव को दी मंजूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को लेकर एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. सरकार का दावा है कि इस विधेयक के अमल में आने के बाद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी. उप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी. 

शर्मा ने बताया कि विद्यालय के शुल्क लेने की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और कोई भी स्कूल सिर्फ चार तरह से ही शुल्क ले सकेंगे, जिसमें विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल है.

उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, अगर कोई वैकल्पिक सुविधा जैसे वाहन, होस्टल, भ्रमण व कैंटीन की सुविधा लेता है, तभी शुल्क देना होगा. हर तरह के शुल्क की रसीद देना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा. उन्होंने बताया कि इन नियमों के दायरे में सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों को भी लिया गया है. साथ ही कोई भी स्कूल बच्चों की ड्रेस में पांच वर्ष तक बदलाव नहीं कर सकेगा और न ही जूते-मोजे किसी दुकान से लेने के लिए बाध्य कर सकेगा.

शर्मा ने बताया कि निजी विद्यालय में किसी भी कमर्शियल कार्य से जो आय होगी, उसे विद्यालय की आय माना जाएगा. सरकार के इन फैसलों से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि ऊर्जा विभाग की परीक्षा नियमावाली में संशोधन को लेकर एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. प्रस्ताव के मुताबिक, सहायक अभियंता की परीक्षा में अब साक्षात्कार 250 अंकों की बजाय केवल 100 अंकों का होगा, जबकि लिखित परीक्षा 750 अंकों का ही होगा. 

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