उपराष्ट्रपति
श्री एम. वैंकेया नायडू ने कहा है कि कृषि पैदावार में मूल्यवर्धन करके
किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है। उपराष्ट्रपति आज मुम्बई में आयोजित
सटीक कृषि में शोध की सीमाओं पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘एएफआईटीए/डब्ल्यूसीसीए 2018’ के
उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी के लिए
एशिया-प्रशांत संघ, कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय
नेटवर्क और कृषि सूचना प्रौद्योगिकी के लिए भारतीय सोसायटी ने इस सम्मेलन
को संयुक्त रूप से आयोजित किया।
उपराष्ट्रपति
ने कहा कि किसानों को अपने कार्यकलापों में विविधता लानी चाहिए और इसके
तहत संबंधित गतिविधियों जैसे कि मत्स्य पालन, डेयरी एवं पोल्ट्री को
अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे कृषि आमदनी का पूरक होना चाहिए।
शहरों
और गांवों के बीच बढ़ती खाई पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि
इस तरह की खाई के बने रहने से अधिकांश आबादी केवल शहरी क्षेत्रों में ही
केंद्रित रहेगी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में अभिनव तकनीकों पर फोकस करते
हुए स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज भी विकसित करने का सुझाव दिया।
उपराष्ट्रपति
ने कहा कि हमें स्मार्ट किसानों की जरूरत है जो नये ज्ञान एवं कौशल को
अपने में समाहित करने में सक्षम हो। प्रौद्योगिकी केवल शहरी क्षेत्रों तक
ही सीमित नहीं रह सकती और इसका प्रचार-प्रसार निश्चित तौर पर बड़ी तेजी से
ग्रामीण आबादी के बीच भी होना चाहिए जिससे कि किसान उससे व्यापक लाभ उठा
सकें। उन्होंने कहा कि यह बात अवश्य ही ध्यान में रखनी चाहिए कि केवल
मजबूत डिजिटल बुनियाद पड़ने पर ही पुनरुत्थान सुनिश्चित हो सकता है।
उपराष्ट्रपति
ने कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में भी
अवश्य होना चाहिए जिससे कि वहां रहने वाले लोग डिजिटल उपकरणों के
इस्तेमाल से समुचित तौर पर अवगत हो सकें। उन्होंने डिजिटल एप्लीकेशंस और
अभिनव तकनीकों का इस्तेमाल कर कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
उपराष्ट्रपति
ने यह राय व्यक्त की कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने से खाद्य
सुरक्षा को बनाये रखने और आजीविका के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव केवल सरकारी सहयोग से ही
संभव नहीं हो सकता है। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों, कृषि विज्ञान
केन्द्रों एवं कृषि अनुसंधान केन्द्रों जैसे संस्थानों और वैज्ञानिकों
को आगे आना होगा। उन्होंने किसानों को संबंधित ज्ञान एवं तकनीकों का
हस्तांतरण करने की जरूरत पर विशेष बल दिया ताकि वे इसे अमल में ला सकें।
इस
अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी.विदयासागर राव, महाराष्ट्र के
स्कूली शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री
श्री विनोद तावडे और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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